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Showing posts from November, 2020

बैंकिग सेवा का भविश्य जोरदार

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मनोज सोनकर आरंग। जैसा की आप सभी जानते है कि एक दौर ऐसा भी था, जब लोगों को सीएससी के जरीए फ्री में बीसी मतलब बैंक मित्र मिल रहा था, उस वक्त लोगों ने ध्यान नहीं दिया। फिर अचानक भारत सरकार ने यह निर्णय लिया की हर व्यक्ति के पास कम से कम एक खाता होना ही चाहिए जिसके तहत उन्होंने प्रधानमंत्री जनधन खाता की षुरूआत की। 10 वर्श के बच्चे से लेकर किसी भी उम्र के महिला पुरूश का खाता इस योजना के अंतर्गत खोला जा सकता है। खाताधारकों की कुल संख्या 294.8 मिलियन थी, जिसमें ग्रामीण और अर्ध-शहरी शाखाओं के 176.1 मिलियन खाताधारक शामिल थे। अगस्त 2017 तक नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा कुल 227 मिलियन रूपे कार्ड जारी किए गए हैं।  बैंक मित्र बनाने ठगी वर्तमान में देखा जाए तो अब बैंक मित्र बनने का होड लग चुका है। लोग साम दाम दंड भेद के जरीए बस बैंक मित्र बन जाए सोचते है, जिसके कारण वे ठगी का भी षिकार होत है। लोगों को आज युटुब गुगल पर इतना भरोशा हो चला है कि अब लोग हर चीज को युटुब गुगल करते है, ऐसे ही मैंने भी ऐ कंपनी में बहुत सारे पैसे डुबोए है। अब मै समझ चुका हूं कि कोई भी युटुब और गुगल ...

बीमा मतलब क्या ?

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मनोज सोनकर आरंग। हमारे यहां आरंग में अभी तक लोगों को बताना पडता है कि बीमा क्या है बीमा क्यों है और बीमा कैसे किया जाता है। आज सुबह मेरे पास एक खाता धारक आए थे अपने परम मित्र के साथ, उसने मुझे बीमा का एक और मतलब सीखा दिया। उनके हिसाब से बीमा कुछ नहीं सिर्फ पैसों की बर्बादी है। ग्राहक के दोस्त के हीसाब से ऐसा था जैसे बीमा अभी करों और षाम तक बीमा के पैसे मिल जाने चाहिए तब तो फायदा है। उनका कहना था की बीमा का पैसा हम जब चाहे तब मिलना चाहिए। मैंने उसे समझाने की बहुत कोषिष की परंतु उन्होंने मेरी बातों को ध्यान तक नहीं दिया। जैसे कि मैंने अपने ग्राकह को सारी जानकारी देकर 12 रूपए का प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा किया था जिसमें अग्रर ग्राहक की कोई दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है तो बीमा के तहत 2 लााख रूपए की सहायता राषि उनके नामनी को मिलता। अगर दुर्घटना में उनका एक हाथ या एक पैर भी अपाहित हो जाता तो उसे बीमा कंपनी की ओर से 1 लाख रूपए का बीमा मिलता। इसी प्रकार से मैंने अपने ग्राहक का 318 रूपए का अटल पेंषन योजना भी किया। जिसमें ग्राहक का उम्र 23 साल का था, और ग्राहक को 38 साल तक प्रतिमाह 318 रूपए खा...

स्वयं सहायता समुह, गरीब परिवार के लिए वर्दान

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VIDEO KE LIYE मनोज सोनकर आरंग।  ऐसे लोग जिनके पास न तो बैंक में गिरवी रखने के लिए कोई संपत्ती है और नही बैंक को दिखाने के लिए कोई ऐसे दस्तावेज जिसे दिखा कर बैंक से लोन लिया जा सके। ये लोग इतने षिक्षीत भी नहीं होते की बैंक जाकर अपनी बातों को रख सके ये तो बैंक जाने के नाम से भी डरते हैं, एसे लोगों के लिए ही यह स्वयं सहायता समुह एक वर्दान बनकर सामने आया है।  जैसा की नाम से ही समझ में आता है कि कोई ऐसा समुह जो स्वयं अपनी मदद करता है, अब ऐसे लोग अपनी एक समुह बनाकर साप्ताहीक कुछ पैसे अपने समुह में जमा करने का फैसला करती है।  ऐसे समुह में 15 से 20 सदस्य या इससे ज्यादा सदस्य भी हो सकते हैं, जो हर सप्ताह कुछ निःष्चित पैसे जमा करते हैं और इस जमा पैसे को किसी सदस्य को न्यूनतम ब्याज पर दे देते हैं, क्योंकि ये सदस्य आपसी पहचान के होते हैं जिसके कारण पैसे वापस करने मे ज्यादा परेषानी नहीं होती और न ही कोई पैसे वापस करने से इंकार कर सकता हैं, और न ही किसी प्राकर का कोई दस्तावेज समुह में जमा करने की जरूरत होती है, इसके पहले ये लोग गांव के साहूकार, लाला, दलाल जैसे लोगों से ही पैसा लेते थे ...

जितना हो सके बचो इस फ्राड कंपनी से

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जितना हो सके बचो इस फ्राड कंपनी से  फ्राड मतलब क्या... वह काम जो किसी को धोखे में डालकर स्वार्थ साधने के लिए किया गया हो उसे फ्राड कहते है, इसे हिन्दी में कपट, छल, दगा, ठगी, धोखाधडी, भ्रष्टाचारी, नकली, ढोंगी, घोटाला, घपला भी कह सकते हैं,  कोई भी फ्राड जो एक आम इंसानों से होती है, वह उसे सिर्फ पैसों का ही नुकसान नहीं कराती बल्की उनके मेहनत, समय और सबसे महत्वपूर्ण उसके आत्मविश्वास का गला भी घोंट देती है, पैसे तो फिर भी दोबारा कमाए जा सकते हैं, परंतु जो समय और मेहनत गया है उसे वापस नहीं लाया जा सकता, और रही बात आत्मविश्वास की तो यह वह ताकत है जिसके दम पर लोग कुछ भी कर जाते है,  आत्मविश्वास ही वह सीढी है जिसे लगाकर बादलों में भी चढा जा सकता है, सिर्फ बादलों में चढा ही नहीं जा सकता बलकी बादलों के पार भी जाया जाता है इसी आत्मविश्वास के दम पर। अगर किसी का आत्मवि’वास टूट जा, तो वह फिर आने वाले अवसरों को भी सक की नजरों से देखने लÛता है जिसके कार.ा वह जिंदगी में पिछड जाता है, और फिर वह समाज और अपने आसपास के लोÛो को अपने वर्तमान हालात का जिम्मेदार मानने लगता है,  मेरा नाम मनोज ...

करोडपती होने की कल्पना

सोचिए और अमीर बनिए क्या आप करोडपती होने की कल्पना कर सकते हैं। हर व्यस्क आदमी जो धन का मतलब समझता है, वह धन चाहता है। परंतु केवल चाहने भर से दौलत नहीं मिल जाती। दौलत निःष्चित रूप से आती है, अगर दौलत हासील करने की प्रबल इच्छा  हो। एसी इच्छा जो दिल दिमांग पर हावी हो जाए और स्थाई मानसीक अवस्था बन जाए। अगर दौलत हासील करने की योजना बनायी जाए या निःष्चित तरीके खोजे जाएं और अगर उन योजनाओं पर द्रिढता और लगन से जूटा रहा जाए और असफलता को पहचानने से इंकार कर दिया जाए।  प्रबल इच्छा को सोने में बदलने के छः तरीके। अमीरी की प्रबल इच्छा को हकीकत में बदलने का एक तरीका है, इस तरीके में छः निःष्चित प्रेक्टीकल कदम है। 1. अपने दिमाग में पैसे की वह निःष्चित मात्रा सोच ले जिसे हासील करने की आपकी प्रबल इच्छा है। केवल यहीं कहना पर्याप्त नहीं है कि मैं ठेर सारा पैसा चाहता हूं, कोई निःष्चित रकम सोंचे। 2. यह तय करले की इस पैसे की आपमें प्रबल इच्छा है। इसके बदले में आप क्या देना चाहते हैं। सच तो यह है कि इस दूनियां में फ्री में कोई चीज हासील नहीं होती। 3. एक निःष्चित तारीख तय कर ले जब तक आप अपने इच्छीत धन...

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा में अक्सर पुछे जाने वाले प्रशन संसोधित...

https://jansuraksha.gov.in/Files/PMJJBY/Hindi/FAQ.pdf     (पॉलिसी वर्ष 2016-17 के लिए) प्रधानमंत्री जीवन ज्योति ब मीमा योजना (पीएमजेजेमीवा ) के                           संमंध में अक्सर  पछेे जाने वािे (संशोधधब) प्रश्न प्रश्न सं-1 योजना की प्रकृति ब क्या है ? यह एक वर्ष की टर्ष जीवन बीर्ा कवर योजना है , जो वर्ष दर वर्ष नवीनीकरणीय है , और जजसर्ें ककसी भी कारण से र्त्ृ यु होने पर जीवन बीर्ा कवर ददया जाता है । प्रश्न सं-2 योजना के अंबर्षब िाभ और  दे य प्रीलमयम क्या होर्ा? ककसी भी कारणवश अभभदाता की र्त्ृ यु होने पर 2 लाख रु. दे य है । प्रीभर्यर् राभश 330/- रु. प्रतत अभभदाता प्रतत वर्ष है | प्रश्न सं-3 प्रीलमयम का भुर्बान कैसे ककया जाएर्ा? नार्ाांकन र्ें दी गयी सहर्तत के अनुसार यह प्रीभर्यर् राभश खाताधारक के बैंक खाते से “ऑटो डेबबट” सुववधा के अनुसार एक ककस्त र्ें काट ली जाएगी। योजना के अनुभव की सर्ीक्षा के दौरान पुनःजाांच र्ें आवश्यक सर्झे जाने वाले...

बिन मांगे मोती मिले, मांगे मिले न भीख,

बिन मांगे मोती मिले मागे मिले न भीख... इस लाईन के आगे का क्या लाइन है बहुंत सर्च करने के बाद भी नहीं मिल रहा है,  अगर आपको पता है कि इस लाईन के बाद क्या आता है तो जरूर लिखिए, मुझे ऐस लगता है कि कौन बनेगा करोडपती में अगर इस सवाल को पुछा जाएग तो लगभग 99 प्रतिशत लोग इसके आगे का नहीं बता पाएंगे.  अगर आपके पास इससे आगे की  लाईन सच में पता हो तभी कमेंट करना.. आत 5 नवंबर 2020 है आशा करता हूं कि बहुत जल्द मुझे इस लाईन को पुरा करने के लिए कोई न कोई ज्ञाता जरूर मिलेगा, धन्यवाद आप सभी का जो आपने मुझे इतना प्यार दिया.

13 साल के बच्चे की सच्ची कहानी

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  एक बहुत ही गरीब परिवार की कहानी है, घर में कुल 6 सदसय है माता (गंगा) पिता (नारायण) और उनके चार बेटे, मोहन, मनोज, मुकेष, मुनेष। यह कहानी मनोज की है जो अभी 8वीं क्लास में है ये वहीं मनोज है जो कक्षा 1 से 5 तक की पढाई कैसे पुरी हुई उसके बारे में कुछ नहीं जानता बस हल्की सी याददास्त है कि कुछ लकडी-लकडी से बना दो तरफ से दिवाल को घेर कर बनाया गया एक रूम के जैसा था। एक ब्लेक बोर्ड था, एक लकडी की कुर्सी सर के बैठने के लिए एक डस्टर जो सर जी के डेस्क में रखी रहती थी। कुछ और बच्चे जो उनके साथा पढते थे, जो लाईन से जमीन में बैंठते थे, लडके अलग लाईन में और लडकीयां अलग लाईन में बैंठते थे, कक्षा से बाहर झाकने पर कुछ स्कुल के छात्र छात्रा बाहर खेलते हुए नजर आते थे, तो कभी कभी कुछ सर मैडम नजर आते थे, कभी चपरासी जो छुटटी के लिए घंटी बजाता था, उस चपरासी का सिर्फ एक ही हाथ था, बस इसलिए वह अच्छे से याद है। वे एक छोटे से घर में रहते थे, कहा जाए तो एक ही रूम था लगभग 10 बाई 10 का जो खदर से बना था, खदर मतलब  जहां सारे दिवाल मिटटी के होते है ओर जो छत होती है वह लकडी और पैरा उपर में पानी न आए करके छिल्ल...