13 साल के बच्चे की सच्ची कहानी

 


एक बहुत ही गरीब परिवार की कहानी है, घर में कुल 6 सदसय है माता (गंगा) पिता (नारायण) और उनके चार बेटे, मोहन, मनोज, मुकेष, मुनेष। यह कहानी मनोज की है जो अभी 8वीं क्लास में है ये वहीं मनोज है जो कक्षा 1 से 5 तक की पढाई कैसे पुरी हुई उसके बारे में कुछ नहीं जानता बस हल्की सी याददास्त है कि कुछ लकडी-लकडी से बना दो तरफ से दिवाल को घेर कर बनाया गया एक रूम के जैसा था। एक ब्लेक बोर्ड था, एक लकडी की कुर्सी सर के बैठने के लिए एक डस्टर जो सर जी के डेस्क में रखी रहती थी। कुछ और बच्चे जो उनके साथा पढते थे, जो लाईन से जमीन में बैंठते थे, लडके अलग लाईन में और लडकीयां अलग लाईन में बैंठते थे, कक्षा से बाहर झाकने पर कुछ स्कुल के छात्र छात्रा बाहर खेलते हुए नजर आते थे, तो कभी कभी कुछ सर मैडम नजर आते थे, कभी चपरासी जो छुटटी के लिए घंटी बजाता था, उस चपरासी का सिर्फ एक ही हाथ था, बस इसलिए वह अच्छे से याद है। वे एक छोटे से घर में रहते थे, कहा जाए तो एक ही रूम था लगभग 10 बाई 10 का जो खदर से बना था, खदर मतलब  जहां सारे दिवाल मिटटी के होते है ओर जो छत होती है वह लकडी और पैरा उपर में पानी न आए करके छिल्ली लगाते है उसे खदर कहते हैं, उस परिवार का गुजारा इसी छोटे से घर में होता था। उस परविार का मुख्य कार्य था खेती बाडी करके जिवन यापन करना। उस घर में खाने की कमी के कारण अक्सर लडाइ झगडा हुआ करता था। लडाई भी इसी नाम से की वो ज्यादा खा लिया और मैने कम खाया।  उस समय परिवार में पैसे नहीं थे पर प्यार बहुत था। घर का गुजारा मां जो सब्जी बेचने जाती थी, और पिता जो सब्जी मंडी में अपने सब्जी बेचने का व्यवसाय करती थी उसी से होता था। धीरे धीरे वक्त बीतता गया और उनका छोटा सा परिवार काम करते करते आगे बढने लगा। 


to be continue...

Comments

Popular posts from this blog

कुंडली कैसे देखते हैं? फायदे, नुकसान.... क्या कुंडली की बातें 100% सही होती हैं?

शराब सेवन: 10 बेहतरीन तरीके बताए जा रहे हैं, जो आपके लिए सस्ते और सुरक्षित हैं:

बच्चों को खुश रखने के 10 तरीके, जिसमें कोई खर्च न हो