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कुंडली कैसे देखते हैं? फायदे, नुकसान.... क्या कुंडली की बातें 100% सही होती हैं?

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  कुंडली कैसे देखते हैं? कुंडली (जन्म कुंडली या जन्म पत्रिका) किसी व्यक्ति के जन्म के समय आकाश में ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति का चार्ट होती है। इसे ज्योतिषी गणनाओं के आधार पर बनाते हैं। कुंडली देखने के लिए ज्योतिष शास्त्र का ज्ञान होना आवश्यक होता है, जिसमें ग्रहों, नक्षत्रों, राशियों और भावों का अध्ययन किया जाता है। कुंडली देखने के लिए निम्नलिखित बातें ध्यान में रखनी होती हैं: जन्म विवरण : व्यक्ति की जन्म तिथि, समय और स्थान जानना आवश्यक है। इससे व्यक्ति का लग्न (Ascendant) और चंद्र राशि निकाली जाती है। भाव और राशियाँ : कुंडली में 12 भाव होते हैं जो जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे धन, स्वास्थ्य, शिक्षा, विवाह आदि को दर्शाते हैं। हर भाव में एक राशि होती है, जो उस भाव के प्रभाव को बताती है। ग्रहों की स्थिति : कुंडली में 9 ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु) की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। ये ग्रह विभिन्न भावों में स्थित होकर व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डालते हैं। दशा और गोचर : कुंडली में ग्रहों की दशा (Vimshottari Dasha) और गोचर (Transit) भी व्यक्ति के जीवन पर...

भावनात्मक आस्था

31 मार्च 2021 तक मेरे पास 20,00,000 रूपए होंगे, जो इस दौरान मेरे पास समय समय पर विविध मात्रा में आएंगे, इस पैसे के एवज में मैं, बैंकिग सेवा, च्वाईस सेंटर, युटुब, संदीप महेष्वरी, षेयर बाजार, वक्रंागी केन्द्र, अंधियार खोप चाय, एवं अन्य साधनों से मैं अपनी सर्वश्रेश्ठ सेवाएं दूंगा, अधिक्तम संभव मात्रा एवं अधिक्तम गुणवत्ता दूंगा, मुझे विष्वास है कि मेरे पास इतना पेसा होगो, मेरी आसथा इतनी दृढ है कि मैं इस धन को अपनी आंखों के सामने अभी देख सकता हूं, मैं इसे अपने हाथों से छु सकता हूं, यह मेरा इंतजार कर रहा है कि यह मेरे पास आए और उस अनुपात में आए जिस अनुपात में मैं अपनी सेवाएं दूंगा, मैं उस योजना का इंतजार कर रहा हूं, जिसके दृवारा मैं इतना धन कमा सकूं और जब मुझे वह योजना मीलेगी तो मैं उसपर अमल करना षुरू कर दूंगा। मनोज सोनकर 9009113222

भविष्य में पहुंचने की अंधी दौड

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  मनोज सोनकर आरंग। आज से 10 साल पिछे मतलब 2010 के बारे में सोंचता हूं तो लगता है  कि क्या बेहतरीन समय था, युट़युब और फिल्मों में उतना गाली गलौच का उपयोग नहीं होता था, परंतु अब एसा लगत है आज से 10 साल बाद मतलब 2030 में गाली गलौच हमारी संस्क़ति में घुस जाएगी, जहां आज ऐसे विडियों जिसपर गाली गलौच हो वे बहुत चलते है बनिसबत जिसमें गाली गलौच न हो, जैसे की आज मैं युटुब में ट्रेड के विडोयों कि रैकिंग देख रहा हूं, तो नंबर वन से लेकर नंबर 5 तक ज्यादातर वहीं विडियों ट्रेड में नंबर एक में है जिसमें भर भर कर गाली गलौच है, अब तो ऐसा लगता है कि बीना गाली गलौच के कोई विडियों ही नहीं बन रहे, मुझे ऐसा लगता है कि अब भारत की संस्क़ति भी इससे अछुती नहीं होगी और ऐसा भविष्य प्रतित होता है मानो बेटा अपने पाप से गाली गलौच के साथ बात कर रहा है, वह भी भरे बाजार में इसमें भी सबको यह बात सामान्य प्रतित हो रही हैा वेबसीज में गालियां और अंग प्रदर्शन आम आज आलम यह है कि जो अपने आपको सो कॉल्ड ब्रांड बोलते है उनके हर वेबसीरिज में या तो गालिया है या तो नंगा नाच मुझे माफ करना की मैं ऐसे सब्दों का प्रयोग कर रहा हूं, ...

बैंकिग सेवा का भविश्य जोरदार

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मनोज सोनकर आरंग। जैसा की आप सभी जानते है कि एक दौर ऐसा भी था, जब लोगों को सीएससी के जरीए फ्री में बीसी मतलब बैंक मित्र मिल रहा था, उस वक्त लोगों ने ध्यान नहीं दिया। फिर अचानक भारत सरकार ने यह निर्णय लिया की हर व्यक्ति के पास कम से कम एक खाता होना ही चाहिए जिसके तहत उन्होंने प्रधानमंत्री जनधन खाता की षुरूआत की। 10 वर्श के बच्चे से लेकर किसी भी उम्र के महिला पुरूश का खाता इस योजना के अंतर्गत खोला जा सकता है। खाताधारकों की कुल संख्या 294.8 मिलियन थी, जिसमें ग्रामीण और अर्ध-शहरी शाखाओं के 176.1 मिलियन खाताधारक शामिल थे। अगस्त 2017 तक नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा कुल 227 मिलियन रूपे कार्ड जारी किए गए हैं।  बैंक मित्र बनाने ठगी वर्तमान में देखा जाए तो अब बैंक मित्र बनने का होड लग चुका है। लोग साम दाम दंड भेद के जरीए बस बैंक मित्र बन जाए सोचते है, जिसके कारण वे ठगी का भी षिकार होत है। लोगों को आज युटुब गुगल पर इतना भरोशा हो चला है कि अब लोग हर चीज को युटुब गुगल करते है, ऐसे ही मैंने भी ऐ कंपनी में बहुत सारे पैसे डुबोए है। अब मै समझ चुका हूं कि कोई भी युटुब और गुगल ...

बीमा मतलब क्या ?

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मनोज सोनकर आरंग। हमारे यहां आरंग में अभी तक लोगों को बताना पडता है कि बीमा क्या है बीमा क्यों है और बीमा कैसे किया जाता है। आज सुबह मेरे पास एक खाता धारक आए थे अपने परम मित्र के साथ, उसने मुझे बीमा का एक और मतलब सीखा दिया। उनके हिसाब से बीमा कुछ नहीं सिर्फ पैसों की बर्बादी है। ग्राहक के दोस्त के हीसाब से ऐसा था जैसे बीमा अभी करों और षाम तक बीमा के पैसे मिल जाने चाहिए तब तो फायदा है। उनका कहना था की बीमा का पैसा हम जब चाहे तब मिलना चाहिए। मैंने उसे समझाने की बहुत कोषिष की परंतु उन्होंने मेरी बातों को ध्यान तक नहीं दिया। जैसे कि मैंने अपने ग्राकह को सारी जानकारी देकर 12 रूपए का प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा किया था जिसमें अग्रर ग्राहक की कोई दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है तो बीमा के तहत 2 लााख रूपए की सहायता राषि उनके नामनी को मिलता। अगर दुर्घटना में उनका एक हाथ या एक पैर भी अपाहित हो जाता तो उसे बीमा कंपनी की ओर से 1 लाख रूपए का बीमा मिलता। इसी प्रकार से मैंने अपने ग्राहक का 318 रूपए का अटल पेंषन योजना भी किया। जिसमें ग्राहक का उम्र 23 साल का था, और ग्राहक को 38 साल तक प्रतिमाह 318 रूपए खा...

स्वयं सहायता समुह, गरीब परिवार के लिए वर्दान

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VIDEO KE LIYE मनोज सोनकर आरंग।  ऐसे लोग जिनके पास न तो बैंक में गिरवी रखने के लिए कोई संपत्ती है और नही बैंक को दिखाने के लिए कोई ऐसे दस्तावेज जिसे दिखा कर बैंक से लोन लिया जा सके। ये लोग इतने षिक्षीत भी नहीं होते की बैंक जाकर अपनी बातों को रख सके ये तो बैंक जाने के नाम से भी डरते हैं, एसे लोगों के लिए ही यह स्वयं सहायता समुह एक वर्दान बनकर सामने आया है।  जैसा की नाम से ही समझ में आता है कि कोई ऐसा समुह जो स्वयं अपनी मदद करता है, अब ऐसे लोग अपनी एक समुह बनाकर साप्ताहीक कुछ पैसे अपने समुह में जमा करने का फैसला करती है।  ऐसे समुह में 15 से 20 सदस्य या इससे ज्यादा सदस्य भी हो सकते हैं, जो हर सप्ताह कुछ निःष्चित पैसे जमा करते हैं और इस जमा पैसे को किसी सदस्य को न्यूनतम ब्याज पर दे देते हैं, क्योंकि ये सदस्य आपसी पहचान के होते हैं जिसके कारण पैसे वापस करने मे ज्यादा परेषानी नहीं होती और न ही कोई पैसे वापस करने से इंकार कर सकता हैं, और न ही किसी प्राकर का कोई दस्तावेज समुह में जमा करने की जरूरत होती है, इसके पहले ये लोग गांव के साहूकार, लाला, दलाल जैसे लोगों से ही पैसा लेते थे ...

जितना हो सके बचो इस फ्राड कंपनी से

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जितना हो सके बचो इस फ्राड कंपनी से  फ्राड मतलब क्या... वह काम जो किसी को धोखे में डालकर स्वार्थ साधने के लिए किया गया हो उसे फ्राड कहते है, इसे हिन्दी में कपट, छल, दगा, ठगी, धोखाधडी, भ्रष्टाचारी, नकली, ढोंगी, घोटाला, घपला भी कह सकते हैं,  कोई भी फ्राड जो एक आम इंसानों से होती है, वह उसे सिर्फ पैसों का ही नुकसान नहीं कराती बल्की उनके मेहनत, समय और सबसे महत्वपूर्ण उसके आत्मविश्वास का गला भी घोंट देती है, पैसे तो फिर भी दोबारा कमाए जा सकते हैं, परंतु जो समय और मेहनत गया है उसे वापस नहीं लाया जा सकता, और रही बात आत्मविश्वास की तो यह वह ताकत है जिसके दम पर लोग कुछ भी कर जाते है,  आत्मविश्वास ही वह सीढी है जिसे लगाकर बादलों में भी चढा जा सकता है, सिर्फ बादलों में चढा ही नहीं जा सकता बलकी बादलों के पार भी जाया जाता है इसी आत्मविश्वास के दम पर। अगर किसी का आत्मवि’वास टूट जा, तो वह फिर आने वाले अवसरों को भी सक की नजरों से देखने लÛता है जिसके कार.ा वह जिंदगी में पिछड जाता है, और फिर वह समाज और अपने आसपास के लोÛो को अपने वर्तमान हालात का जिम्मेदार मानने लगता है,  मेरा नाम मनोज ...