कुंडली कैसे देखते हैं? फायदे, नुकसान.... क्या कुंडली की बातें 100% सही होती हैं?
कुंडली कैसे देखते हैं? कुंडली (जन्म कुंडली या जन्म पत्रिका) किसी व्यक्ति के जन्म के समय आकाश में ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति का चार्ट होती है। इसे ज्योतिषी गणनाओं के आधार पर बनाते हैं। कुंडली देखने के लिए ज्योतिष शास्त्र का ज्ञान होना आवश्यक होता है, जिसमें ग्रहों, नक्षत्रों, राशियों और भावों का अध्ययन किया जाता है। कुंडली देखने के लिए निम्नलिखित बातें ध्यान में रखनी होती हैं: जन्म विवरण : व्यक्ति की जन्म तिथि, समय और स्थान जानना आवश्यक है। इससे व्यक्ति का लग्न (Ascendant) और चंद्र राशि निकाली जाती है। भाव और राशियाँ : कुंडली में 12 भाव होते हैं जो जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे धन, स्वास्थ्य, शिक्षा, विवाह आदि को दर्शाते हैं। हर भाव में एक राशि होती है, जो उस भाव के प्रभाव को बताती है। ग्रहों की स्थिति : कुंडली में 9 ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु) की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। ये ग्रह विभिन्न भावों में स्थित होकर व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डालते हैं। दशा और गोचर : कुंडली में ग्रहों की दशा (Vimshottari Dasha) और गोचर (Transit) भी व्यक्ति के जीवन पर...