भविष्य में पहुंचने की अंधी दौड
मनोज सोनकर आरंग। आज से 10 साल पिछे मतलब 2010 के बारे में सोंचता हूं तो लगता है कि क्या बेहतरीन समय था, युट़युब और फिल्मों में उतना गाली गलौच का उपयोग नहीं होता था, परंतु अब एसा लगत है आज से 10 साल बाद मतलब 2030 में गाली गलौच हमारी संस्क़ति में घुस जाएगी, जहां आज ऐसे विडियों जिसपर गाली गलौच हो वे बहुत चलते है बनिसबत जिसमें गाली गलौच न हो, जैसे की आज मैं युटुब में ट्रेड के विडोयों कि रैकिंग देख रहा हूं, तो नंबर वन से लेकर नंबर 5 तक ज्यादातर वहीं विडियों ट्रेड में नंबर एक में है जिसमें भर भर कर गाली गलौच है, अब तो ऐसा लगता है कि बीना गाली गलौच के कोई विडियों ही नहीं बन रहे, मुझे ऐसा लगता है कि अब भारत की संस्क़ति भी इससे अछुती नहीं होगी और ऐसा भविष्य प्रतित होता है मानो बेटा अपने पाप से गाली गलौच के साथ बात कर रहा है, वह भी भरे बाजार में इसमें भी सबको यह बात सामान्य प्रतित हो रही हैा वेबसीज में गालियां और अंग प्रदर्शन आम आज आलम यह है कि जो अपने आपको सो कॉल्ड ब्रांड बोलते है उनके हर वेबसीरिज में या तो गालिया है या तो नंगा नाच मुझे माफ करना की मैं ऐसे सब्दों का प्रयोग कर रहा हूं, ...